मरीजों की बढ़ती संख्या को देख पुणे के इंजीनियरों ने 12 घंटे में बना डाला वेंटीलेटर, कीमत 50 हजार रुपए

News Desk
  • अभी कंपनी ने सिर्फ 2 पीस वेंटीलेटर तैयार किए हैं, जरूरी परमीशन के बाद इसका कमर्शियल उत्पादन किया जाएगा
  • जिस कंपनी ने यह वेंटीलेटर बनाए हैं उसका मुख्य बिजनेस ऐसे रोबोट्स का निर्माण करना है जो सोलर पैनेल्स को साफ करते हैं
  • पुणे | कोरोना के खिलाफ लड़ाई को लेकर पुणे से कई अच्छी खबर आई है। यहां की एनओसीसीए रोबोटिक्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी ने पोर्टेबल वेंटीलेटर तैयार किया है। खास बात यह है कि इस वेंटीलेटर की शुरुआती कीमत 50 हजार रखी गई है। आमतौर पर हॉस्पिटल में जो वेंटीलेटर इस्तेमाल होते हैं उनकी कीमत दो लाख से 13 लाख रुपए तक होती है। एनओसीसीए के फाउंडर हर्षित राठौड़ ने दैनिक भास्कर ने बात की। इसमें उन्होंने बताया कि उन्हें वेंटीलेटर बनाने का आइडिया कैसे आया?

    सवाल: वेंटीलेटर बनाने का आइडिया कैसे आया?
    हर्षित: दिनों-दिन कोरोना के पेशेंट्स बढ़ रहे हैं। उनके ट्रीटमेंट में वेंटीलेंटर अहम है। देश में वेंटीलेटर की भारी कमी के चलते मार्च में मैंने अपने पार्टनर निखिल कुरेले से ऐसा वेंटीलेटर बनाने के बारे में बात की जो पोर्टेबल हो और उसकी कीमत कम हो। हम दोनों ने यह आइडिया अपने इंजीनियरों से शेयर किया। फिर सिर्फ दो दिन में वेंटीलेटर बनाने की प्लानिंग पर काम शुरू हुआ। आने वाले समाय में हमें बड़ी संख्या में वेंटीलेटर्स की जरुरत पड़ने वाली है।

    सवाल: बनाने में कितना समय लगा?
    हर्षित: इस वेंटीलेटर के प्रोटोटाइप को सिर्फ 12 घंटे में मेरी टीम ने तैयार किया है। हालांकि, इसे पूर्ण रुप देने में दो दिन का समय लगा। हमने 24 मार्च को सुबह इसपर काम करना शुरू किया और तकरीबन 12 घंटे के प्रयास के बाद इसका प्रोटोटाइप तैयार कर लिया।

    सवाल: क्या खास है इस वेंटीलेटर में?

    हर्षित: यह वेंटीलेटर खासतौर पर कोरोना पेशेंट्स को ध्यान में रखकर बनाया गया है। नार्मल वेंटीलेटर में कई अन्य फीचर होते हैं जो इसमें नहीं होंगे। लेकिन कोरोना पेशेंट्स के लिए बेहद कारगर होगा। यही नहीं लंग्स की हर बीमार मरीज को इससे मदद मिल सकेगी। इसमें हम बाजार में पहले से मौजूद वेंटीलेटर्स के वे सारे फीचर डाल रहे हैं जो एक कोरोना मरीज के लिए मददगार रहेंगे। ये वेंटिलेटर पोर्टेबल हैं। वेंटीलेटर में किसी तरह की कोई कमी न रहे इसके लिए आईआईटी कानपुर के कुछ डॉक्टर्स प्रोफेसर को भी इस प्रोजेक्ट्स से जोड़ा गया है।

    सवाल: अभी तक कुल कितने वेंटीलेटर का निर्माण हुआ?

    हर्षित: हमारी टीम ने अभी तक 2 वेंटीलेटर का निर्माण कर लिया और आने वाले एक सप्ताह में 20-30 वेंटीलेटर बनाने की तैयारी है। हमारा मकसद है कि पहले से वेंटीलेटर बना रही किसी बड़ी कंपनी के साथ जुड़कर इसका कमर्शियल उत्पादन शुरू करें । कंपनी आने वाले 10 से 15 दिन में इसका क्लीनिकल ट्रायल पूरा कर लेगी और भारत सरकार के स्वास्थ्य विभाग से अनुमोदन भी प्राप्त कर लेगी। पुणे जिला प्रशासन के अधिकारी भी आवश्यक अनुमति प्राप्त करने में हमारी मदद कर रहे हैं।

    सवाल: किस स्तर पर होगा इसका उत्पादन
    हर्षित: फिलहाल, हम एक महीने में कम से कम 10 हजार पीस का निर्माण करने की सोच रहे हैं।

    दो साल पहले शुरू हुई है यह कंपनी
    आईआईटी कानपुर के पासआउट और कंपनी में पार्टनर निखिल बताते हैं कि दो साल पहले इस कंपनी को शुरू किया था। हम ऐसे रोबोट्स का निर्माण करते हैं जो सोलर पैनेल्स को साफ करते हैं। लेकिन दुनिया में बढ़ रहे कोरोनावायरस संक्रमित लोगों की संख्या को देखते हुए हमने यह तय किया कि वे इसके पेशेन्टस के लिए खास वेंटीलेटर का निर्माण करेंगे।

    (साभार :दैनिक भास्कर)

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